गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (जीएफसीसी) | जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय | भारत सरकार

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गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (जीएफसीसी)

गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग जो जल संसाधन मंत्रालय का एक अधीनस्थ कार्यालय है और जिसका मुख्यालय पटना में है, की स्थापना 1972 में भारत सरकार के संकल्प सं एफ.सी.-47(3)/72 दिनांक 18 अप्रैल, 1972 के द्वारा गंगा बेसिन राज्यों में बाढ़ और उसके प्रबंधन हेतु की गई थी। गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड के सचिवालय और कार्यकारी विंग के अध्यक्ष माननीय केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री होते हैं तथा बेसिन राज्यों के मुख्यमंत्री अथवा उनके प्रतिनिधि और सदस्य, योजना आयोग बोर्ड के सदस्य होते हैं। जीएफसीसी के अध्यक्ष बोर्ड के सदस्य सचिव के रूप में काम करते हैं।

अध्यक्ष द्वारा आयोग की अध्यक्षता की जाती है जिसकी सहायता पूर्णकालिक सदस्य, निदेशक और 94 सहायक स्टॉफ करते हैं। इसके अतिरिक्त कार्य प्रभारित स्टॉफ के 19 स्वीकृत पद हैं। संबंधित केन्द्रीय मंत्रियों के प्रतिनिधियों के साथ साथ बेसिन राज्यों के मुख्य अभियंता अंशकालिक सदस्य अथवा आयोग के स्थायी रूप से आमंत्रित सदस्य होते हैं।

जीएफसीसी निम्नलिखित कार्यकलाप करता है:-

  • बाढ़ प्रबंधन की व्यापक योजना बनाना और उसे अद्यतन करना।
  • बाढ़ प्रबंधन योजनाओं का तकनीकी-आर्थिक मूल्यांकन करना।
  • सड़क और रेल पुलों के नीचे से जलमार्गों की पर्याप्तता का आकलन करना।
  • बाढ़ प्रबंधन कार्यों के कार्यान्वयन की प्रोग्रामिंग करना।
  • गुणवत्ता नियंत्रण और अनुरक्षण हेतु दिशानिर्देश तैयार करना।
  • केन्द्र सरकार द्वारा वित्तपोषित सभी बाढ़ प्रबंधन योजनाओं और केन्द्र सरकार द्वारा वित्तपोषित महत्वपूर्ण बाढ़ प्रबंधन योजनाओं की निगरानी करना।
  • विशेष अध्ययनों की सिफारिशों का प्रलेखन और उनका प्रसार करना।
  • पूरी हो चुकी बाढ़ प्रबंधन योजनाओं के कार्य-निष्पादन का मूल्यांकन करना।

बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल गंगा बेसिन राज्य हैं।