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नेरीवाल्म

उत्तर-पूर्व क्षेत्रीय जल और भूमि प्रबंधन संस्थान (नेरीवाल्म)

उत्तर-पूर्व क्षेत्रीय जल और भूमि प्रबंधन संस्थान (नेरीवाल्म) की स्थापना उत्तर-पूर्व परिषद (एनईसी) शिलांग के तहत एक पंजीकृत सोसाइटी के रूप में 23 दिसम्बर, 1989 को तेजपुर, असम में की गई थी। जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार ने एनईसी और उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय के साथ 1 जून, 2012 को एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जिसके द्वारा जल संसाधन मंत्रालय ने 1 अप्रैल, 2012 को सिंचाई और कृषि विकास हेतु जल और भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में एक क्षमता निर्माण संस्थान के रूप में नेरीवाल्म को अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया।

इस संस्थान की स्थापना निम्नलिखित मुख्य उद्देश्यों/ कार्यों के लिए की गई है:-

  1. सिंचाई और कृषि हेतु विशेष रूप से जल भूमि प्रबंधन में तथा विज्ञान की सभी शाखाओं, सैद्धान्तिक और प्रयुक्त, में निर्देश/प्रशिक्षण देने हेतु वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त करना और विज्ञान में प्रगति को बढावा देना।
  2. किसानों, जल प्रयोक्ता संघ के सदस्यों को निर्देश और प्रशिक्षण देने तथा सिंचाई और कृषि हेतु जल और भूमि प्रबंधन में अनुसंधान करने हेतु एक संस्थान स्थापित करना।
  3. सिंचाई और कृषि हेतु जल और भूमि प्रबंधन में सरकार, स्थानीय निकायों और अन्य संगठनों को परामर्शी सेवाएं देना।
  4. जल और भूमि प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं में अनुसंधान और प्रयोग करना तथा अनुसंधान और विकास के लिए अन्य संगठनों के साथ सहयोग करना।
  5. किसानों या जल प्रयोक्ता संघों के सदस्यों और पदाधिकारियों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण जैसे आउटरीच कार्यकलाप आयोजित करना ताकि उनकी तकनीकी और प्रबंधन क्षमताएं बढाई जा सकें और उनके क्षेत्राधिकार में जल वितरण नेटवर्क के विकास और प्रबंधन में उनकी सक्रिय और प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
  6. पूर्वोत्तर राज्यों के साथ बेहतर समन्वय को सुकर बनाने हेतु मुख्य स्थलों पर क्षेत्रीय केन्द्र स्थापित करना तथा भूमि और जल प्रबंधन संबंधी आउटरीच कार्यकलापों को सहायता देना।
  7. जमीनी स्तर पर आउटरीच कार्यकलापों को प्रभावी रूप से निष्पादित करने हेतु गैर-सरकारी संगठनों/निजी भागीदारों के साथ संपर्क स्थापित करना।

इस संगठन की वेबसाइट: neriwalm.gov.in को देखने के लिए यहां क्लिक करें।