महादायी/ मनदोवी नदी | जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय | भारत सरकार

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मुख्‍य पृष्‍ठ कार्य न्यायाधिकरण मौजूदा अंतर-राज्‍यीय नदी जल विवाद और अधिकरण महादायी/ मनदोवी नदी

महादायी/ मनदोवी नदी

जुलाई, 2002 में गोवा राज्‍य ने अंतराज्‍जीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (यथा संशोधित) के तहत अधिकरण के गठन के लिए उक्‍त अधिनियम की धारा 3 के तहत अनुरोध किया और इस मामले को मनदोवी नदी के संबंध में इस विवाद के न्‍याय निर्णयन के लिए मामले को संदर्भित कर दिया । इस अनुरोध में इस अधिकरण आदि के निर्णय के कार्यान्‍वयन करने के लिए तंत्र पर निर्णय करने के लिए बेसिन के भतीर जल के इस्‍तेमाल की प्राथमिकता को देखते हुए उल्‍लिखित मुद्दे में विभिन्‍न बिंदुओं पर बेसिन में उपलब्‍ध उपयोग वाले जल संसाधन का मूल्‍यांकन और 3 बेसिन राज्‍यों को जल आबंटन करना शामिल था। इस अधिनियम में यह आवश्‍यक है कि केन्‍द्र सरकार का यदि विचार है कि जल विवाद को समझौता द्वारा नहीं सुलझाया किया जा सकता है तो, वह एक अधिकरण गठित करेगा।

इसलिए, जुलाई, 2002 से ही जल संसाधन मंत्रालय में केन्‍द्र सरकार के कार्य और प्रयास वस्‍तुत: इस अधिनियम के उक्‍त उपबंधों द्वारा निर्देशित थे। इस प्रक्रिया के अनुसरण में माननीय केन्‍द्रीय जल संसाधन मंत्री ने दिनांक 4.4.2006 को गोवा, कर्नाटक और महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री स्‍तर की एक अंतरराज्‍जीय बैठक बुलायी थी। इस अंतरराज्‍जीय बैठक में लिए गए निर्णय पर अनुवर्ती कार्रवाई के संबंध में गोवा सरकार की बाद की कार्रवाई ने यह आभास दिया कि गोवा राज्‍य इस समझौता प्रक्रिया को आगे ले जाने के लिए तैयार नहीं है और यह चाहता है कि एक अधिकरण का गठन हो और तत्‍काल ही इस अधिकरण में इस मामले को भेजा जाए। तदनुसार ही, केन्‍द्र सरकार ने जल संसाधन मंत्रालय में यह बता है कि जुलाई, 2002 में गोवा राज्‍य के अनुरोध में निहित विवाद को समझौता द्वारा समाधान नहीं किया जा सकता है और अंतरराज्‍जयीय जल विवाद अधिनियम,1956 के उपबंधों और इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार इस मामले में समझौता और कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

इसी बीच गोवा सरकार ने उक्‍त नदी जल के न्‍याय निर्णयन और निर्माण गतिविधियों में स्‍थगन के लिए वादकालीन आवेदन (आईए) के लिए जल विवाद अधिकरण की स्‍थापना के लिए सितम्‍बर, 2006 में माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय में एक वाद दायर किया । इस आवेदन के साथ रिट याचिका को माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय के समक्ष कई अवसरों पर सूचीबद्ध किया गया है। इसी बीच मंत्रिमंडल ने दिनांक 10.12.2009 को अपनी बैठक में इस पर विचार किया और महायादी अधिकरण के गठन के प्रस्‍ताव को अनुमोदित किया।

आवास संबंधी मंत्रिमंडल समिति ने दिनांक 06.10.2010 की अपनी बैठक में नई दिल्‍ली में स्‍थित अधिकरण के प्रस्‍ताव को अनुमोदित कर दिया ।

केन्‍द्र सरकार ने दिनांक 16 नवम्‍बर, 2010 की अधिसूचना के तहत महायादी जल विवाद अधिकरण (एमडब्‍लूडीटी) का गठन किया है।

इसके अतिरिक्‍त, केन्‍द्र सरकार ने दिनांक 13 नवम्‍बर, 2014 की अधिसूचना के तहत निर्णय लिया कि एमडब्‍लूडीटी के गठन की प्रभावी तिथि 16 नवम्‍बर, 2010 के बदले 21 अगस्‍त, 2013 होगी। तदनुसार हीं, अधिकरण 21 अगस्‍त, 2013 से प्रभावी तीन वर्ष की अवधि अर्थात 20 अगस्‍त, 2016 से पूर्व केन्‍द्र सरकार को इस अधिनियम की धारा 5 की उपधारा (2) के तहत अपनी रिपोर्ट अग्रेषित करेगा। इसके अतिरिक्‍त अधिकरण के अनुरोध पर केन्‍द्र सरकार ने 11 अगस्‍त, 2016 की अधिसूचना के तहत 21 अगस्‍त, 2016 से प्रभावी होकर एक वर्ष की अवधि के लिए अधिकरण के कार्यकाल को बढ़ा दिया है।