विश्‍व बैंक | जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय | भारत सरकार

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मुख्‍य पृष्‍ठ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाएं विश्‍व बैंक

विश्‍व बैंक

विश्‍व बैंक सहायता प्राप्‍त परियोजनाएं:

नोडल खंड: बाहरी सहायता खंड

विश्‍व बैंक द्वारा सहायता प्राप्‍त चल रही योजनाओं की संक्षिप्‍त स्‍थिति नीचे दी गयी है:

1. मध्‍य प्रदेश जल खंड पुनर्गठन परियोजना [क्रेडिट संख्‍या 4750 - आईएन (आईबीआरडी)]

नोडल विभाग: जल संसाधन विभाग

संघटक:  इस परियोजना के मुख्‍य संघटक हैं (एक) जल संसाधन प्रबंधन- संस्‍थान और लिखत, (दो) सेवा आपूर्ति सिंचाई और जल प्रवाह संस्‍थान, (तीन) छह बेसिनों में चयनित विद्यमान सिंचाई और जल प्रवाह आस्‍तियों की संवर्धित उत्‍पादकता, और (चार) परियोजना प्रबंधन। इस परियोजना में कुल 654 उप परियोजनाएं, 6 वृहत, 33 मझौले और 615 लघु उप परियोजनाएं शामिल हैं। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत है 412.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर, जिसमें से विश्‍व बैंक की बाहरी सहायता 387.40 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। इस परियोजना को नवम्‍बर, 2004 में शुरू किया गया था और इसे जून, 2015 में समाप्‍त किया जाना था। दिनांक 31.03.2015 तक 318.37 मिलियन अमेरिकी डॉलर का संवितरण किया गया है।

सिंचाई प्रभाव:  2,42,300 हेक्‍टेयर के सिंचाई अंतर को पाटने के लिए लक्षित इस परियोजना की तुलना में उपलब्‍धि 2,57,200 हेक्‍टेयर की है। इस परियोजना के अंतर्गत रबी सिंचाई आपूर्ति वर्ष 2009-10 के 1,50,329 की तुलना में बढ़कर वर्ष 2012-13 में 5,10,112 हेक्‍टेयर हो गया।  

2. आन्‍ध्र प्रदेश और तेलंगाना जल क्षेत्र सुधार परियोजना (एपीटीडब्‍लूएसआईपी) [क्रेडिट संख्‍या 7897 आईएन (आईबीआरडी)] 

नोडल विभाग: सिंचाई और सीएडी विभाग

उद्देश्‍य:  इस परियोजना का उद्देश्‍य नागार्जुन सागर कमान में सिंचित कृषि की उत्‍पादकता को बढ़ाने के लिए सतत आधार पर सिंचाई सेवा आपूर्ति में सुधार करने के लिए बहु क्षेत्रीय योजना, विकास और जल संसाधन प्रबंधन हेतु राज्‍य संस्‍थागत क्षमता को सुदृढ़ करना है।

संघटक:   इस परियोजना के मुख्‍य संघटक हैं: (एक) जल क्षेत्र संस्‍थागत पुनर्गठन और क्षमता वर्धन, (दो) नागार्जुन सागर योजना में संवर्धित सिंचाई सेवा आपूर्ति, (तीन) समेकित कृषि गहनता और विविधीकरण; और (चार) परियोजना प्रबंधन। इस परियोजना को अगस्‍त, 2010 में शुरू किया गया था और इसको समाप्‍त करने की तिथि जुलाई, 2018 है। इस परियोजना की कुल लागत 988.97 मिलियन अमेरिकी डॉलर है और विश्‍व बैंक की सहायता 450.60 मिलियन अमेरिकी डॉलर (आईबीआरडी) है । दिनांक 31.03.2015 तक 142.50 मिलियन अमेरिकी डॉलर संवितरित कर दी गयी है।

3. ओडिशा सामुदायिक तालाब प्रबंधन परियोजना [क्रेडिट संख्‍या 7576 आईएन (आईबीआरडी) और 4499 आईएन (आईडीए)]

नोडल विभाग:  जल संसाधन विभाग

उद्देश्‍य:   इस परियोजना का उद्देश्‍य तालाब प्रणाली को प्रभावी तरीके से प्रबंध करने के लिए कृषि उत्‍पादकता में सुधार लाना और जल उपयोगकर्ता संघों (डब्‍लूयूए) को सुदृढ़ करना है।

संघटक: इस परियोजना के मुख्‍य संघटक  हैं (एक) संस्‍थागत सुदृढ़ता, (दो) तालाब प्रणाली सुधार, (तीन) कृषि आजीविका सहायता सेवा प्रदान करना और, (चार) परियोजना प्रबंधन। इस परियोजना को जनवरी, 2009 में शुरू किया गया और बंद होने की तिथि जून, 2016 है। इस परियोजना की लागत 87.80 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, इसमें से आईबीआरडी संघटक के अंतर्गत विश्‍व बैंक की ऋण सहायता और आईडीए संघटक क्रमश: 38.47 मिलियन अमेरिकी डॉलर और एक्‍सडीआर 16.98 मिलियन है। दिनांक 31.03.2015 तक आईबीआरडी और आईडीए संघटकों के अंतर्गत संचयी वितरण क्रमश: 13.70 मिलियन अमेरिकी डॉलर और एक्‍सडीआर 8.91 मिलियन डॉलर है। 

4. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना समुदाय आधारित तालाब प्रबंधन परियोजना [क्रेडिट संख्‍या 4857 -आईएन (आईबीआरडी) और 4291- आईएन (आईडीए)]

नोडल विभाग: सिंचाई और सीएडी विभाग

उद्देश्‍य:इस परियोजना का उद्देश्‍य लघु सिंचाई प्रणाली, कृषि आजीविका सहायता सेवाओं व परियोजना प्रबंधन सहित संस्‍थागत सुदृढ़ता में सुधार करना है।

संघटक: इस परियोजना के मुख्‍य संघटक हैं: (i) संस्‍थागत मजबूती, (ii) लघु सिंचाई प्रणाली सुधार, (iii) कृषि आजीविका सहायता सेवाएं, और (iv) परियोजना प्रबंधन, जिससे इस परियोजना से संबंधित प्रबंधन, समन्‍वय, निगरानी, अधिगम और मूल्‍यांकन प्रयासों को सहायता प्राप्‍त होगी। इस परियोजना को जून, 2007 में शुरू किया गया था और इसके समाप्‍त होने की तिथि जुलाई, 2016 है। इस परियोजना की कुल लागत 217.80 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, जिसमें से आईबीआरडी संघटक और आईडीए संघटक के अंतर्गत विश्‍व बैंक सहायता क्रमश: 87 मिलियन अमेरिकी डॉलर और 58.14 मिलियन एक्‍सडीआर है। आईबीआरडी संघटक के अंतर्गत 67.00 मिलियन अमेरिकी डॉलर और आईडीए संघटक के अंतर्गत एक्‍सडीआर 43.40 मिलियन की राशि दिनांक 31.03.2015 तक जारी की जा चुकी है।

5. तमिलनाडु सिंचित कृषि आधुनिकीकरण और जल निकाय पुनर्भरण और प्रबंधन परियोजना [क्रेडिट संख्‍या - 4846 आईएन (आईबीआरडी) और 4255- आईएन (आईडीए)]

नोडल विभाग:सिंचाई और लोक निर्माण विभाग

उद्देश्‍य: इस परियोजना का विकास संबंधी उद्देश्‍य धारणीय जल संसाधन प्रबंधन रूपरेखा में उप बेसिन पणधारकों के लिए सिंचित कृषि की उत्‍पादकता को बढ़ाना है।

संघटक: इस परियोजना के मुख्‍य संघटक  हैं: (एक) उप बेसिन ढ़ांचे (अर्थात् लगभग 4 लाख हेक्‍टेयर के कृषि योग्‍य कमान क्षेत्र (सीसीए) के साथ लगभग 5261 तालाबों का पुनर्वास) में सिंचाई प्रणाली आधुनिकीकरण; (दो) कृषि तीव्रीकरण और विविधीकरण; (तीन) सिंचित कृषि के लिए संस्‍थागत आधुनिकीकरण; और (चार) जल संसाधन प्रबंधन। इस परियोजना को फरवरी,2007 में शुरू किया गया था और इसके समाप्‍त होने की तिथि है जून, 2015। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 566 मिलियन अमेरिकी डॉलर है जिसमें से विश्‍व बैंक की सहायता 485 अमेरिकी डॉलर है। आईबीआरडी और आईडीए के अंतर्गत 422 मिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि दिनांक 31.03.2015 तक संवितरित कर दी गयी है।

6. पश्‍चिम बंगाल त्‍वरित लघु सिंचाई विकास परियोजना [क्रेडिट संख्‍या 8090 - आईएन (आईबीआडी) और 5014 आईएन (आईडीए)]

नोडल विभाग: जल संसाधन जांच और विकास विभाग

उद्देश्‍य: इस परियोजना का उद्देश्‍य उन क्षेत्रों में कृषि उत्‍पादकता में तेजी लाने का है जो क्षेत्र वर्तमान में वर्षा जल सिंचित दशा में है। इस परियोजना के अंतर्गत राज्‍य के 18 जिलों में लगभग 4,660 लघु सिंचाई योजनाओं का विकास किया जाएगा। सिंचाई के अंतर्गत कुल 1.39 लाख हेक्‍टेयर कमान क्षेत्र को लाया जाना है। इस परियोजना की कुल लागत 1143.00 करोड़ रूपए है । विश्‍व बैंक की ऋण सहायता 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर है जिसमें 125 मिलियन अमेरिकी डॉलर और एक्‍सडीआर 78.20 मिलियन (116.40 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर) शामिल है जो क्रमश: आईबीआरडी और आईडीए के अंतर्गत है । इस परियोजना को दिसम्‍बर, 2011 में शुरू किया गया था और इसके समाप्‍त होने की तिथि दिसम्‍बर, 2017 है। दिनांक 31.3.205 की स्‍थिति के अनुसार 1.22 मिलियन अमेरिकी डॉलर (आईबीआरडी) और 9.31 मिलियन एक्‍सडीआर (आईडीए) की राशि का संवितरण किया जा चुका है।

7. बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (डीआरआईपी) [क्रेडिट संख्‍या 7943-आईएन (आईबीआरडी) और क्रेडिट संख्‍या 4787-आईएन (आईडीए)]

नोडल विभाग: तमिलनाडु और केरल के राज्‍य जल संसाधन विभाग और राज्‍य विद्युत बोर्ड

उद्देश्‍य: विश्‍व बैंक की 2100.00 करोड़ रूपए की अनुमानित लागत सहायता से बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (डीआरआईपी) को शुरू किया गया है। चार राज्‍यों यथा मध्‍य प्रदेश, ओडिशा, केरल और तमिलनाडु में लगभग 223 बड़े बांधों का इस परियोजना के अंतर्गत पुनर्वास किया जाएगा। पांच और राज्‍य/ संगठन (नामत: कर्नाटक, पंजाब, उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तरांचल जल विद्युत निगम लिमिटेड और दामोदर घाटी निगम) की भी पहचान बाद में डीआरआईपी में शामिल किए जाने के लिए की गयी है जिसके लिए आबंटित संसाधनों हेतु प्रावधान को परियोजना अनुमान में प्रदान किया गया था।

डीआरआईपी के अंतर्गत शामिल किए गए बांधों की राज्‍य-वार संख्‍या और परियोजना लगत का अनुमान संक्षेप में नीचे दिया गया है:
राज्‍य बड़े बांधों की संख्‍या डीआरआई बांधों की संख्‍या परियोजना लागत (करोड़ रू.)
केरल 54 31 279.98
उड़ीसा 163 38 147.74
मध्‍य प्रदेश 906 50 314.54
तमिलनाडु 108 104 745.49
सीडब्‍लूसी 132.00
गैर आवंटित संसाधन 480.24
कुल 223 2100.00

कुल परियोजना लागत में से 80 प्रतिशत का वित्‍तपोषण विश्‍व बैंक के ऋण से किया जाएगा जबकि 20 प्रतिशत वित्‍तपोषण संबंधित राज्‍य सरकारों और केन्‍द्रीय जल आयोग द्वारा किया जाएगा। पहचान किए गए बांधों के पुनर्वासा और सुधार के लिए संरचनात्‍मक और गैर संरचनात्‍मक उपायों के अलावा इस परियोजना के कार्यक्षेत्र में शामिल है – भागीदार करने वाले राज्‍यों में सभी बड़े बांधों के सुरक्षित परिचालन और अनुरक्ष्‍ण के लिए उपयुक्‍त संस्‍थागत तंत्रों का विकास। इसके अतिरिक्‍त राष्‍ट्रीय स्‍तर पर बांध की सुरक्षा निगरानी और मार्गदर्शन हेतु संस्‍थागत सेटअप को मजबूत करने का कार्य केन्‍द्रीय जल आयोग द्वारा किया जाएगा।

डीआरआईपी के लिए परियोजना कार्यान्‍वयन एजेन्‍सी भाग लेने वाले चार राज्‍यों के जल संसाधन विभाग (डब्‍लूआरडी) और तमिलनाडु व केरल के राज्‍य विद्युतीय बोर्ड हैं। इस परियोजना के समग्र कार्यान्‍वयन का समन्‍वय केन्‍द्रीय जल आयोग द्वारा किया जाएगा । डीआरआईपी परियोजना के लिए संशोधित ऋण राशि 139.65 मिलियन अमेरिकी डॉलर (आईबीआरडी) और 93.02 मिलियन अमेरिकी डॉलर (आईडीए) है। 0.44 मिलियन अमेरिकी डॉलर (आईबीआरडी) और 9.08 मिलियन एक्‍सडीआर (आईडीए) का भुगतान 31.03.2015 तक कर दिया गया है।

8. उत्‍तर प्रदेश जल क्षेत्र पुनर्गठन परियोजना, चरण दो [क्रेडिट संख्‍या. 5298 आईएन]

नोडल विभाग: सिंचाई विभाग

उद्देश्‍य:   इस परियोजना का विकास उद्देश्‍य है (क) समग्र राज्‍य के लिए समेकित जल संसाधन प्रबंधन हेतु संस्‍थागत और नीतिगत रूपरेखा को मजबूत करना; और (ख) लक्षित सिंचित क्षेत्रों में समर्थक किसानों द्वारा कृषि उत्‍पादों और जल उत्‍पादों को बढ़ाना।

संघटक:  इस परियोजना के छह संघटक हैं: (क) राज्‍य स्‍तरीय जल संस्‍थान और अंतर क्षेत्रीय समन्‍वय को मजबूत करना; (ख) सिंचाई और प्रवाह प्रणाली का आधुनिकीकरण और पुनर्वास; (ग) सिंचाई संस्‍थान सुधार का समेकन और संवर्धन; (घ) संवर्धन कृषि उत्‍पादन और कृषि क्षेत्र प्रबंधन; (ड.) अगले चरण के लिए संभाव्‍यता और तैयारी संबंधी क्रियाकलापों; और (च) परियोजना समन्‍वय और निगरानी।

ऋण संबंधी समझौते को दिनांक 24.10.2013 को हस्‍ताक्षर किया गया और अंतिम संवितरण तितिथ 31.10.2020 है। कुल परियोजना लागत 515 मिलियन अमेरिकी डॉलर है जिसमें से विश्‍व बैंक की सहायता एक्‍सडीआर 239.40 मिलियन (360 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर) है। 31.03.2015 तक 17.24 मिलियन अमेरिकी डॉलर का संवितरण किया गया है।

(ख) सिंचाई प्रणाली का आधुनिकीकरण और पुनर्वास: समानांतर निम्‍न गंगा नहर और बुंदेलखंड क्षेत्र में दो प्रमुख सिंचाई प्रणाली में पुनर्वास और आधुनिकीकरण कार्यों को शुरू किया गया है। निम्‍न गंग नहर प्रणाली में 95 प्रतिशत कार्य पूरे हो चुके हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र में यद्यपि संविदा पर हस्‍ताक्षर किये जा चुके थे किंतु आज तक की स्‍थिति के अनुसार कोई प्रगति नहीं हुई है । जहां तक हैदरगढ़ शाखा पर सिविल कार्य कासंबंध है प्रतिस्‍पर्धात्‍मक बोली चल रही है और बोली को 12.06.2014 को खोला जाएगा ।