राष्ट्रीय जल मिशन कार्यान्वयन | जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय | भारत सरकार

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राष्ट्रीय जल मिशन कार्यान्वयन

मुख्य उद्देश्य और पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय जल मिशन (एनडब्ल्यूएम) का मुख्य उद्देश्य ''समेकित जल संसाधन विकास और प्रबंधन के माध्यम से राज्यों के भीतर और बाहर जल के संरक्षण, उसकी न्यूनतम बर्बादी और उसका अधिक समान वितरण करना'' है। मिशन के पांच चिन्हित लक्ष्य है:(क)व्यापक जल डाटाबेस को सार्वजनिक करना तथा जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का आकलन करना; (ख) जल संरक्षण, संवर्धन और परिरक्षण हेतु नागरिक और राज्य कार्रवाई को बढावा देना; (ग) अधिक जल दोहित क्षेत्रों सहित कमजोर क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करना; (घ) जल उपयोग कुशलता में 20 प्रतिशत की वृद्धि करना; (ड.) बेसिन स्तर तथा समेकित जल संसाधन प्रबंधन को बढावा देना।

लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए विभिन्न कार्यनीतियों की पहचान की गई है जिनसे विश्वसनीय डाटा और सूचना पर आधारित जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का आकलन करने के आधार पर बेहतर स्वीकार्यता हेतु विकास परिदृश्य और प्रबंधन प्रक्रियाओं की पहचान और उनका मूल्यांकन करने के पश्चात हितधारकों की सक्रिया भागीदारी से सतत विकास और प्रभावी प्रबंधन के लिए समेकित योजना बनाई जा सकती है।

वर्षा में अपेक्षाकृत काफी बड़े पैमाने पर अस्थायी बदलाव और परिणामत: नदी प्रवाह और भूमिगत जल एक्विफरों में परिवर्तन भारत में जल संसाधनों की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। यद्यपि जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को सटीकता से नहीं मापा गया है, अनेक अध्ययन यह दर्शाते हैं कि जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभाव इसे और व्यापक बनाने में योगदान दे सकते हैं। इसके अलावा, जल संसाधन की विशेषताएं- उपलब्धता तथा मात्रा, शहरीकरण, औद्योगीकरण और वन क्षेत्र में बदलाव के तौर पर भूमि उपयोग में बदलाव द्वारा भी काफी प्रभावित हो सकती है। यह महसूस करते हुए कि जलविज्ञान चक्र को प्रभावित करने वाली अनेक प्रक्रियाएं गतिशील स्वरूप की हैं विशेषकर जलवायु परिवर्तन के कारण प्रभाव की सही मात्रा का पता लगाना एक आसान काम नहीं है और आरंभिक स्तरों पर उपयुक्त अवधारणा बनाना तथा समय के साथ-साथ उपलब्ध होने वाले अधिकाधिक डाटा के साथ विस्तृत सिमुलेशन अध्ययन करना जरूरी है। तथापि जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन का संभावित प्रभाव निम्नलिखित के रूप में हो सकता है:-

  1. हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियरों और बर्फ के क्षेत्र में कमी;
  2. देश के अनेक भागों में वर्षा के दिनों की संख्या में समग्र कमी के कारण सूखे की स्थिति में वृद्धि;
  3. वर्षा के दिनों की तीव्रता में भारी वृद्धि के कारण बाढ़ आने की घटनाओं में वृद्धि।
  4. बाढ़ और सूखे की घटनाओं में वृद्धि के कारण कछारी एक्विफरों में भूमि-जल की गुणवत्ता पर प्रभाव
  5. वृष्टिपात और वाष्पीकरण में बदलाव के कारण भूमि-जल पुनर्भरण पर प्रभाव;
  6. समुद्र के बढ़ते जल स्तर के कारण तटीय तथा द्वीपीय एक्विफरों में लवणीयता का बढ़ना।

उपर्युक्त से यह स्पष्ट है कि जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभाव के संदर्भ में भारत में सर्वाधिक कमजोर क्षेत्र में शामिल हैं (क) सूखा-प्रवण क्षेत्र, (ख) बाढ़-प्रवण क्षेत्र, (ग) तटीय क्षेत्र, (घ) कम वर्षा वाले क्षेत्र, (ड.) भूमि-जल विकास के अति दोहित, महत्वपूर्ण और कम-महत्वपूर्ण स्तर वाले क्षेत्र, (च) प्रभावित जल गुणवत्ता वाले क्षेत्र और (छ) बर्फ सिंचित नदी बेसिन। राष्ट्रीय जल मिशन के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए पहचाने गए कार्यकलापों को समयबद्ध पूरा करने तथा राज्य सरकारों के साथ विभिन्न स्तरों पर अनुरोध करने के माध्यम से पहचानी गई नीतियों के कार्यान्वयन और आवश्यक विधान बनाना सुनिश्चित करने, दोनों के संदर्भ में दीर्घकालिक सतत प्रयास करने की परिकल्पना की गई है।

PDF icon ख. राष्ट्रीय जल मिशन हेतु व्यापक मिशन दस्तावेज-खंड-I (पीडीएफ 787 के बी)
PDF icon ग. राष्ट्रीय जल मिशन हेतु व्यापक मिशन दस्तावेज-खंड-II (पीडीएफ 3.24 एम बी)